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माँ, मैं माँ बन गई.

19 June 2026 व्यूज़: 32
माँ, मैं माँ बन गई

माँ, मैं माँ बन गई,
पर तेरे लिए आज भी वही छोटी-सी बेटी हूँ।
ज़िंदगी की राहों में चलते-चलते,
न जाने कितने टुकड़ों में बँट गई हूँ।

शादी को इतने साल हो गए,
फिर भी तेरा आँचल ही सुकून देता है।
न जाने क्यों हर बार छुट्टियों का इंतज़ार रहता है,
और छुट्टियाँ खत्म होते ही
तुझसे दूर जाने का ग़म सताता है।

माँ, मैं माँ बन गई,
पर तेरी गोद में सिर रखकर सोने को दिल चाहता है।
तेरे हाथों से बना खाना खाने को दिल चाहता है,
तेरे पास बैठकर घंटों बातें करने को दिल चाहता है।

माँ, मैं माँ तो बन गई,
पर बेटी बने रहने का दिल चाहता है।
ये विदाई हर साल मुझे रुलाती है,
तुझसे दूर होकर मन बेचैन हो जाता है।
माँ, मैं माँ तो बन गई,
पर तेरे ही आँगन में जीने का दिल चाहता है।

तूने मुझे चलना सिखाया था,
आज तुझे झुककर चलते देख दिल घबराता है।
तूने मुझे हर काम सिखाया था,
आज तेरे काँपते हाथ देखकर मन भर आता है।

तूने मुझे पढ़ना-लिखना सिखाया,
दुनिया को समझना सिखाया।
आज जब तुझे कुछ बातें भूलते देखती हूँ,
तो मन कहीं भीतर से सहम जाता है।

माँ, मैं माँ बन गई,
पर आज भी तेरी गोद में सिर रखकर
बेख़ौफ़ सोने को दिल चाहता है।
आज भी तेरी डाँट में प्यार ढूँढ़ता है,
आज भी तेरी ममता में अपना संसार देखता है।

क्योंकि उम्र चाहे जितनी भी बढ़ जाए,
ज़िम्मेदारियाँ चाहे कितनी भी बढ़ जाएँ,
एक बेटी के लिए उसकी माँ ही
उसका पहला घर, पहला प्यार
और सबसे बड़ा सुकून होती है।

माँ, मैं माँ बन गई...
पर तेरी बेटी बने रहने का दिल आज भी चाहता है। ❤️
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