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यूँ उदास न कर

06 January 2026 व्यूज़: 55
ग़म की अँधेरी रात में
दिल को यूँ बेचैन न कर,
हर रात के बाद सवेरा है,
बस थोड़ी सी उम्मीद तो कर।

टूटे ख़्वाबों की इस खामोशी में,
ख़ुद को यूँ उदास न कर,
सुबह की रौशनी आएगी ज़रूर,
बस उस सुबह का इंतज़ार तो कर।
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